आज यानी 12 सितंबर 2026 को दिल्ली से एक बड़ी खबर सामने आई है। BRICS देशों ने आपस में सहमति बनाकर Delhi Declaration को मंजूरी दे दी है। ये कोई छोटी बात नहीं है, क्योंकि पिछले कई हफ्तों से Iran और UAE के बीच एक बड़ा मतभेद चल रहा था। हालात ऐसे बन गए थे कि लग रहा था इस बार शायद कोई साझा बयान (joint statement) निकल ही नहीं पाएगा।
लेकिन भारत की मेज़बानी में हुई आखिरी वक्त की बातचीत के बाद ये विवाद सुलझ गया, और सभी 11 सदस्य देश एक राय पर आ गए। अगर आप भी सोच रहे हैं कि Delhi Declaration क्या है और इसमें ऐसा क्या खास है जो पूरी दुनिया की नज़र इस पर टिकी है, तो इस आर्टिकल में हम आपको ये पूरी कहानी बिल्कुल आसान भाषा में समझाएंगे।
Delhi Declaration BRICS क्या है?
सबसे पहले ये समझ लेते हैं कि ये Declaration आखिर होता क्या है। हर साल जब BRICS देशों के नेता एक साथ मिलते हैं, तो समिट के आखिर में एक साझा दस्तावेज़ जारी किया जाता है। इस दस्तावेज़ में बताया जाता है कि सभी सदस्य देश किन-किन मुद्दों पर एक साथ खड़े हैं, और आने वाले साल में किन बातों पर मिलकर काम करेंगे।
इस साल भारत BRICS का अध्यक्ष (chair) है, इसलिए इस बार के दस्तावेज़ का नाम रखा गया है "New Delhi Declaration"। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद पहले दिन की बैठकें खत्म होने के बाद इसके पास होने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि ये Declaration आगे के लिए एक साफ दिशा देता है, और अब सबकी जिम्मेदारी है कि इन बातों को असल नतीजों में बदला जाए।
18वां BRICS Summit और भारत मंडपम
ये पूरी कहानी समझने के लिए थोड़ा पीछे चलते हैं। 18वें BRICS Summit का आयोजन नई दिल्ली के भारत मंडपम में हो रहा है, और ये दो दिन का समिट है — 12 और 13 सितंबर। इस बार की थीम रखी गई है — "Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability", यानी मजबूती, नवाचार, सहयोग और टिकाऊपन पर आधारित निर्माण।
भारत ने 1 जनवरी 2026 को BRICS की अध्यक्षता संभाली थी, और उसके बाद से कई मंत्री-स्तरीय बैठकें हो चुकी हैं। इस समिट में सिर्फ पुराने BRICS देश यानी भारत, रूस, चीन, ब्राज़ील और साउथ अफ्रीका ही शामिल नहीं हैं, बल्कि हाल ही में जुड़े नए सदस्य जैसे Iran, UAE, Egypt, Ethiopia और Indonesia भी इसका हिस्सा हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन खुद दिल्ली पहुंचे, और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी पूरे 7 साल बाद पहली बार भारत आए हैं।
आखिर Iran-UAE के बीच विवाद था क्या?
अब आते हैं असली मुद्दे पर। पिछले कुछ महीनों से पश्चिम एशिया (West Asia) में हालात काफी तनावपूर्ण रहे हैं। अमेरिका और इज़रायल की तरफ से Iran पर सैन्य कार्रवाई हुई थी, और उसके जवाब में Iran ने भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों के साथ-साथ UAE और आसपास के कुछ इलाकों में भी हमले किए थे। Iran का कहना था कि ये सिर्फ आत्मरक्षा (self-defence) में उठाया गया कदम था।
लेकिन UAE इस बात से पूरी तरह सहमत नहीं था। UAE चाहता था कि Declaration में Iran के हमलों की भी उतनी ही साफ आलोचना हो, जितनी अमेरिका-इज़रायल की कार्रवाई की। वहीं दूसरी तरफ Iran की मांग थी कि दस्तावेज़ में अमेरिका और इज़रायल के हमलों की खुलकर निंदा (condemnation) की जाए। यानी दोनों देश एक-दूसरे से बिल्कुल उलट बात पर अड़े हुए थे।
ये मतभेद इतना गहरा था कि इससे पहले मई 2026 में हुई BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में भी कोई साझा बयान नहीं निकल पाया था। उस समय भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को मजबूरन सिर्फ अपनी तरफ से एक "Chair's Summary" जारी करनी पड़ी थी, क्योंकि बाकी देश किसी एक भाषा पर राज़ी नहीं हो पा रहे थे। यही वजह है कि इस बार भी शुरुआत में यही डर था कि Delhi Declaration Iran UAE के इसी विवाद की वजह से अटक सकता है।
आखिर ये बड़ा गतिरोध टूटा कैसे?
अब सवाल ये है कि इतना गहरा मतभेद आखिर सुलझा कैसे। जानकारों का मानना है कि इसके पीछे भारत की पर्दे के पीछे की कूटनीति (back-channel diplomacy) का बहुत बड़ा हाथ है। समिट शुरू होने से पहले और उसके दौरान भी भारतीय अधिकारियों ने दोनों पक्षों से अलग-अलग स्तर पर लगातार बातचीत की।
इसी बीच एक बेहद अहम पल भी देखने को मिला — Iran के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायद के बीच सीधी मुलाकात हुई। ये मुलाकात इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि जब से पश्चिम एशिया में जंग शुरू हुई थी, तब से इन दोनों नेताओं की ये पहली आमने-सामने की बातचीत थी। इसी मुलाकात को बर्फ पिघलने की असली शुरुआत माना जा रहा है।
आखिरी वक्त तक बातचीत चलती रही, और पहले दिन की बैठकें खत्म होने से ठीक पहले दोनों पक्ष आखिरकार एक भाषा पर राज़ी हो गए। इस तरह सभी 11 सदस्य देशों की सहमति से New Delhi Declaration 2026 को औपचारिक मंज़ूरी मिल गई।
भारत की कूटनीति एक बार फिर चमकी
ये पहला मौका नहीं है जब भारत ने इस तरह की मुश्किल स्थिति को इतनी कुशलता से संभाला हो। साल 2023 में जब भारत ने G20 की मेज़बानी की थी, तब भी रूस-यूक्रेन जंग को लेकर पश्चिमी देशों और रूस के बीच गहरे मतभेद थे, और तब भी दुनिया को शक था कि कोई साझा घोषणापत्र निकल पाएगा या नहीं। लेकिन भारत ने आखिरी वक्त तक बातचीत करके सबको एक राय पर ला दिया था, जिसकी दुनियाभर में जमकर तारीफ हुई थी।
अब 2026 में BRICS की अध्यक्षता के दौरान भी भारत ने ठीक वैसी ही कूटनीतिक सफलता दोहराई है। इससे साफ है कि दुनिया के अलग-अलग खेमों में बंटे देशों को एक मेज़ पर लाने में भारत की भूमिका अब सिर्फ एक मेज़बान की नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद मध्यस्थ (trusted mediator) की बन चुकी है।
समिट में और क्या-क्या बड़ा हुआ?
Delhi Declaration BRICS के पास होने के अलावा इस समिट के दौरान कई और अहम द्विपक्षीय मुलाकातें भी हुईं, जो आगे चलकर काफी असर डाल सकती हैं:
- प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति पुतिन के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई, जिसमें यूक्रेन युद्ध जल्द खत्म करने और दोनों देशों के बीच व्यापार को 100 अरब डॉलर तक बढ़ाने के लक्ष्य पर चर्चा हुई।
- मोदी और Iran के राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान के बीच Hormuz जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़े मुद्दों पर भी बात हुई, क्योंकि यहां से गुजरने वाले जहाज़ों की आवाजाही पूरी दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम मानी जाती है।
- चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का 7 साल बाद भारत दौरा भी इस समिट की एक बड़ी खासियत रहा, जिसे भारत-चीन रिश्तों में सुधार का संकेत माना जा रहा है।
इतने बड़े-बड़े वैश्विक मुद्दों के बीच, दिल्ली शहर वैसे भी इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ है। BRICS Summit खत्म होते ही 13 सितंबर से यहीं दिल्ली में IND vs AFG T20 सीरीज़ भी शुरू होने जा रही है, यानी राजधानी में एक के बाद एक बड़े इवेंट्स लगातार होते जा रहे हैं।
BRICS का महत्व दुनिया में लगातार क्यों बढ़ रहा है?
अब जरा समझते हैं कि आखिर BRICS को लेकर इतनी हलचल क्यों रहती है। शुरुआत में ये सिर्फ पांच देशों — ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और साउथ अफ्रीका — का एक समूह था। लेकिन पिछले कुछ सालों में इसमें Iran, UAE, Egypt, Ethiopia और Indonesia जैसे देश भी जुड़ गए हैं। इस विस्तार के बाद अब BRICS दुनिया की एक बड़ी आबादी और एक बड़े हिस्से की अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है।
यही वजह है कि जब भी BRICS का कोई बड़ा फैसला आता है, तो उसका असर सिर्फ सदस्य देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया की व्यापार नीति, तेल कीमतों और कूटनीतिक संतुलन पर भी दिखाई देता है। कई जानकार तो इसे पश्चिमी देशों के दबदबे वाले पुराने वैश्विक ढांचे के मुकाबले एक नए विकल्प के तौर पर भी देखते हैं। ऐसे में जब भारत जैसे देश की अध्यक्षता में एक मुश्किल विवाद सुलझकर Delhi Declaration के रूप में सामने आता है, तो ये सिर्फ एक कागज़ी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक साख का भी सबूत बन जाता है।
Delhi Declaration का असर आम आदमी की ज़िंदगी पर
अब बात करते हैं कि इस पूरे घटनाक्रम का असर एक आम भारतीय की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर कैसे पड़ सकता है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का सीधा असर कच्चे तेल (crude oil) की सप्लाई और कीमतों पर पड़ता है। यही वजह है कि हाल ही में Saudi Oil Pipeline पर हुए हमले के बाद भारत में पेट्रोल-डीज़ल महंगा होने की आशंका भी जताई जाने लगी थी।
अगर Delhi Declaration की वजह से Iran और UAE के बीच तनाव कम होता है, और आगे चलकर पूरे West Asia में शांति की दिशा में और कदम बढ़ते हैं, तो इसका सीधा फायदा तेल की सप्लाई में स्थिरता और कीमतों में राहत के तौर पर देखने को मिल सकता है। यानी ये सिर्फ बड़े नेताओं की कूटनीति भर नहीं है — इसका असर घूम-फिरकर आपकी और हमारी जेब तक भी पहुंचता है।
आगे क्या होगा?
18वां BRICS Summit दो दिन का है, इसलिए 13 सितंबर को भी कई अहम बैठकें होनी बाकी हैं। दूसरे दिन व्यापार, डिजिटल भुगतान और आपसी निवेश जैसे मुद्दों पर और गहराई से बात होने की उम्मीद है। इसमें एक "unified BRICS payment system" यानी सदस्य देशों के बीच लेन-देन को आसान बनाने वाले साझा भुगतान सिस्टम पर भी चर्चा जारी है, ताकि व्यापार में डॉलर पर निर्भरता कुछ कम की जा सके।
अगर आप विदेश नीति और वैश्विक मामलों में दिलचस्पी रखते हैं, तो अगले 24 घंटों में इससे जुड़ी और भी कई बड़ी खबरें सामने आ सकती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. Delhi Declaration क्या है?
ये 18वें BRICS Summit के आखिर में सभी सदस्य देशों की सहमति से जारी किया गया साझा दस्तावेज़ है, जिसमें आने वाले समय के लिए साझा दिशा और प्राथमिकताएं तय की गई हैं।
2. Delhi Declaration में Iran-UAE का विवाद क्यों था?
पश्चिम एशिया में जारी जंग को लेकर दोनों देशों की राय अलग-अलग थी — Iran चाहता था अमेरिका-इज़रायल की निंदा हो, जबकि UAE चाहता था Iran के हमलों की भी आलोचना हो।
3. ये विवाद कैसे सुलझा?
भारत की पर्दे के पीछे की कूटनीति और Iran-UAE राष्ट्रपतियों की सीधी मुलाकात के बाद आखिरी वक्त में दोनों पक्ष एक भाषा पर राज़ी हो गए।
4. BRICS Summit 2026 कहां हो रहा है?
ये समिट नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12-13 सितंबर 2026 को हो रहा है, और इसकी अध्यक्षता भारत कर रहा है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, Delhi Declaration BRICS का पास होना भारत की कूटनीति के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है। Iran और UAE जैसे दो बिल्कुल अलग-अलग सोच वाले देशों को एक मंच पर लाकर सहमति बनवाना आसान काम नहीं था, लेकिन भारत ने ये कर दिखाया। आने वाले दिनों में इस Declaration का असर धीरे-धीरे साफ होता जाएगा, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि दुनिया की नज़रें अभी भी दिल्ली पर टिकी हुई हैं।
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